हम निहायत अकेले रह गये…



इस बीच सत्रह साल बीत गये

 सफर के हम राही रह गये...

मंजिल को कोई ओर फतह कर गये...

हम निहायत अकेले ही रह गये

......…

जीवन में कैसे-कैसे इम्तिहान दे गये ...

करिअर में हद्द से ज्यादा सफल हो गये...

दूनिया से लड़ते-झगडते रह गये...

जिंदगी के मैदान की बाजी, हां यार हम हार गये...

हम निहायत अकेले ही रह गये।

......

जन्म से आज तक ...

हमने क्या पाया,क्या खोया...

इसका हिसाब लगाते रहे गये…

कभी घटा तो कभी जोड़ के चक्कर में रह गये 

क्या कहुं हम निहायत अकेले ही रह गये...

.....

राह में निकले तो राहगीर चाहिए..

हमें अपना कहनेवाला कोई 'खास' चाहिए...

चलते रहे हम ,युं ही आस लगाए..

मंजिल कब की हमसे दूर हो गयी.

हम हाथ मलते-मलते रह गये...

क्या कहुं हम निहायत अकेले ही रह गये...

.....

जिंदगी के इम्तिहान में पास होना बाक़ी है...

'हमारे' नहीं मिलेंगे ,आस छोड़ना बाकी है...

मन तृण -तृण हो रहा है,मृग की प्यास अभी बाक़ी है...

सांस रहेगी जब तलक..तेरी आस हमेशा बाकी है...

हम उम्मीद लगाए बैठे रह गये...

क्या कहुं हम निहायत अकेले ही रह गये...

....

उम्मीद रहेगी…क्योंकि उम्मीद पर …

दुनिया मुक्कमल है…

हम अभी नाउम्मीद नहीं हुए हैं जनाब…

उम्मीद रखकर जीने और…

मरने में भी मजा है नवाब…

ऑंखों ने हिकारत से देखना छोड़ा नहीं है…

हिया ने हार मानना सिखा नहीं है…

किसी ने हमारे सफलता की कामना की है…

कैसे ‘उनको’ हमारे असफलता की कहानी सुनाते ..

हमारी सफलता में उनके सफलता की कथा बुनते..

हम जीवन के सफलता की कथा बुनते रह गये…

 प्यार  की कसौटी पर हारते रह गये…

क्या कहुं हम निहायत अकेले ही रह गये..

निहायत…

अकेले …

ही…

रह…

गये…


शिव लिखित…

गोविंद…


क्या ????

कसूर था ....उस बेकसूर का?

जो खुद बेगुनाह होकर गुनाह कर बैठा.  .....

किसी की जिंदगी मे बेवजह तशरीफ लाने की....

वजह बनी तकलीफ की......

खता तो हालातो ने की...

खफा हम खुदा से हुए...

उम्मीद पर दुनिया टिकी है....

इस पंक्ती ने ना उम्मीद कर दिया....

आसान नही है बहती भावनाओको रोकना....

हमने ही सिखा अपनी भावनाओको हसके टोकना.....

संभलना जब आयेगा हमे....

हैंराणी भी होगी तुम्हे....

कैसी है यहा अजब पहेली की..

हमारी गजब सहेली......

काश! काबू रख पाते हम खुद पर...

तकदीर ने अगर मिलाया होता तो नाज भी होता खुदा पर....

खैर अब हम "खैरात "क्या? मांगे.....

खुदा से खुद के लिये...

दुवाओमे आपकी ही....

सदा "खैरीयत" मांगेगे खुदा से......

बेहाल कर दिया हमे...

हमारे ही हाल ने...

हाल ही मे मिल आये हम

अपने ही "हल"से......

"तरक्की के कगार" पर उन्हे पाया.....

आखे भर आई जब बरसो बाद सामने पाया....

पल भर के लिये साथ का वह पल...

उम्र भर के लिए यादगार बन गया वोह पल.......

दोनो की आखो ने छुपाया वह खारा जल.. 

जिसका चाहकर भी निकाल ना पाये वह हल.....

हर कदम साथ जिसका मिलना था हकीकत मे....

"अपना" ,"सपना",'सपना'ही रह गया..

यह समझा गया "वास्तव"," हकिकत"मे......



हमारे शहर में…


हमारे शहर का सुने हाल…

रास्तों में भीड़  की रेलचेल 

नई नई कॉलोनियॉ

फ्लैटों की दुनिया ने

हमारे दालान, ऑंगन छीन लिए 

छोटे होते घरों ने

दिलों को भी छोटा बना दिया है।

अब न छतों पर कबुतर दिखते 

न प्यासों के लिए प्यॉऊ 

पशुओं के पानी की लिए नांदे

स्वच्छता अभियान कागजी हो गया है

आओ हाथ में झाडु पकड़ों

हम फोटो चमकाते हैं।

तुम्हारी चमको गिरी खत्म हुई है तो

हम पर भी कॅमेरा गुमाओं 

हमारे शहर में …

 अधिकतम तापमान ४५ पार हो गया है

वृक्ष लगाएं का नारा हर बार का हो गया  है 

गढ़ा पुराना, पर गजब की बातं हैं

वृक्ष हर साल नया होता है…

हमारे शहर में..

मेहमान अब नहीं लगते भगवान  

मेजबानों की बने हैं परेशान 

घरों के बुज़ुर्ग बेकार सामान की तरह

बिखरे -बिखरे नजर आते हैं ।

तब्दील होती ये छोटी बस्तियां 

आहिस्ता आहिस्ता उस ओर जा रही है 

जहां दिल्ली, मुंबई,चैन्नई पहुंच चुकी है 

हमारे शहर में 

बाजार ही सब कुछ बन गया है…

इंसान एक ग्राहक ही रह गया है 

फैले हुए बाजार की सबसे बड़ी ताकत

पब्लिसिटी है…इसलिए 

क्रिकेट और फिल्मी चेहरों के 

जगह जगह लगे है पोस्टर्स 

चौराहे पर टॅंगे होर्डिंग्स 

बीस-बीस इंसानों का बन जाते हैं काल..

उपर से उसी पर भून लेते हैं

राजनीति के स्वार्थ रोटी

हमारे शहर में…

अखबारों और टीवी के स्क्रीन पर 

चलते विज्ञापन 

प्रचार प्रसार के बाजार ने

हमारी नापसंद को पसंद बना दिया है

आजकल खिलाड़ी मैदान में खेलते कम

बाजार में साबुन,तेल, साइकिल बेचते दिख पडते हैं 

सनी देओल एक तरफ देशभक्ति 

का ध्वज लहराते हैं

दूसरी ओर बनियान और अंडरवियर के

‘’अंदर की बात’’ बताते हैं…

हमारे शहर भी और 

हमारी जिंदगी भी 

बदल सी गयी है…

हां बदल सी गयी है…

हम ऊल-जुलूल रंगने वाले की तरह हो गये है….


डॉ गोविंद गुंडप्पा शिवशेट्टे रोषणगांवकर 

-9423909705

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